विक्रोली (पार्कसाइट), मुंबई ।
मुंबई महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 124 में इस बार चुनाव से पहले ही राजनीति गरमा गई है। NCP (अजित पवार) की बाग़ी उम्मीदवार फ़ौज़िया अयाज़ पठान को लेकर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह केवल एक बग़ावत की नहीं, बल्कि एक समर्पित कार्यकर्ता के साथ हुए राजनीतिक अन्याय की कहानी बयां करती है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वास्तव में वार्ड 124 से NCP (अजित पवार) का टिकट फ़ौज़िया अयाज़ पठान को ही मिलने वाला था। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनके पति अयाज़ पठान का वह संघर्ष और निष्ठा है, जो उन्होंने पिछले 10 वर्षों से पार्टी और क्षेत्र के लिए दिखाई।
अयाज़ पठान बीते एक दशक से वार्ड 124 में पार्टी के लिए हर वह कार्य करते रहे, जो एक जिम्मेदार पार्टी पदाधिकारी से अपेक्षित होता है—चाहे पार्टी के कार्यक्रम हों, जनहित के सामाजिक कार्य हों या संगठन को मज़बूत करना। यहां तक कि जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो गुटों में विभाजित हुई, तब भी अयाज़ पठान के पास विकल्प होने के बावजूद उन्होंने अजित पवार के नेतृत्व के साथ खड़े रहने का निर्णय लिया, क्योंकि वे अजित पवार को अपना राजनीतिक आदर्श मानते हैं।
स्थानीय पार्टी नेताओं ने भी अयाज़ पठान को आगामी BMC चुनाव में टिकट देने का खुला आश्वासन दिया था। सूत्र बताते हैं कि वार्ड 124 से संभावित उम्मीदवार के रूप में अयाज़ पठान के घर जाकर साक्षात्कार तक लिया गया, और यह बात रिकॉर्ड पर स्वीकार की गई कि उनके अलावा इस वार्ड में कोई दूसरा मज़बूत उम्मीदवार नहीं है।
बाद में जब वार्ड 124 को महिला आरक्षण में रखा गया, तब भी पार्टी ने अयाज़ पठान की पत्नी फ़ौज़िया अयाज़ पठान को टिकट देने का निर्णय लिया था। नामांकन की अंतिम तारीख तक अयाज़ पठान को यह कहकर रोका गया कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और वे उसी भरोसे के साथ वार्ड की सेवा करते रहे।
लेकिन आख़िरी समय में अचानक राजनीतिक समीकरण बदले, और बताया जा रहा है कि पहले से ही NCP (शरद पवार) गुट से चुनाव लड़ने की सोच रखने वाले सिराज अहमद शेख की पत्नी को NCP (अजित पवार) की टिकट दे दी गई। इस फैसले ने वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता को एक बार फिर राजनीतिक दौड़ से बाहर करने की कोशिश को उजागर कर दिया।
हालांकि, इस घटनाक्रम को अयाज़ पठान ने हार नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने अपने दख़्खनी समाज के वरिष्ठजनों, क्षेत्र के समाजसेवक आसिफ शेख ( राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी अजित पवार पार्टी के अल्पसंख्यांक विभाग के मुंबई उपाध्यक्ष) और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श कर अपनी पत्नी फ़ौज़िया अयाज़ पठान का स्वतंत्र (अपक्ष) नामांकन कराया।
अयाज़ पठान ने साफ़ किया है कि उनके साथ जो भी हुआ, वह स्थानीय राजनीति का हिस्सा है, लेकिन वे आज भी अजित पवार को ही अपना नेता मानते हैं और यह चुनाव भी वे अजित पवार के चेहरे पर ही लड़ रहे हैं, क्योंकि वे इसे अपना अधिकार मानते हैं।
दख़्खनी समाज में अयाज़ पठान एक सक्रिय और सम्मानित राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं। उल्लेखनीय है कि 1962 से वार्ड 124 में दख़्खनी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब इस समाज से कोई नेतृत्व चुनाव मैदान में उतरा है। यही कारण है कि दख़्खनी समाज पूरी मजबूती से फ़ौज़िया अयाज़ पठान के पीछे खड़ा दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड 124 में दख़्खनी समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य समुदायों के मतदाता भी अयाज़ पठान के इस फैसले से संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और फ़ौज़िया अयाज़ पठान की उम्मीदवारी को स्वीकार कर चुके हैं।
अब वार्ड 124 में सवाल साफ़ है—
क्या वर्षों की निष्ठा को नज़रअंदाज़ करने वाली राजनीति को जनता जवाब देगी?
और क्या यह चुनाव स्थानीय राजनीति की दिशा बदलने वाला साबित होगा?
