मुंबई | विक्रोली (पार्कसाइट)
मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर विक्रोली के पार्कसाइट इलाके का वार्ड नंबर 124 इन दिनों सियासी हलचल का केंद्र बना हुआ है। महिला वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट पर मुकाबला जितना बहुकोणीय है, उतना ही रणनीतियों और संदेशों को लेकर चर्चित भी। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि BJP–शिवसेना (एकनाथ शिंदे) युति की उम्मीदवार ज्योति हारून खान के प्रचार में न तो पार्टी के स्टार प्रचारक उतारे जा रहे हैं और न ही BJP के लोगो का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
वार्ड 124: उम्मीदवार कई, मुकाबला कड़ा
वार्ड 124 से इस बार लगभग सभी प्रमुख दल मैदान में हैं।
- BJP–शिवसेना (एकनाथ शिंदे) युति से ज्योति हारून खान चुनाव लड़ रही हैं।
- शिवसेना (उद्धव ठाकरे)–मनसे–एनसीपी (शरद पवार) महाविकास आघाड़ी की ओर से सकीना अयूब शेख उम्मीदवार हैं।
- एनसीपी (अजित पवार गुट) से जैदा सिराज अहमद शेख,
- इसके अलावा वंचित बहुजन आघाड़ी, AIMIM और तीन अपक्ष उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं।
कहां दिख रही है असली टक्कर?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, वार्ड 124 में मुख्य मुकाबला BJP–शिवसेना (एकनाथ शिंदे) युति की उम्मीदवार ज्योति हारून खान और उद्धव ठाकरे गुट की सकीना शेख के बीच दिखाई दे रहा है। मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को देखते हुए दोनों पक्ष ज़मीनी स्तर पर रणनीति साध रहे हैं।
स्टार प्रचारक से दूरी क्यों?
चुनावी माहौल में एक अहम चर्चा तेज़ है। सूत्रों के अनुसार, BJP के स्टार प्रचारक और पूर्व सांसद किरीट सोमैया को मुस्लिम बहुल वार्ड 124 की रैलियों से जानबूझकर दूर रखा गया है।
हालांकि उन्हें पड़ोसी वार्ड 123 में प्रचार करते देखा गया, लेकिन वार्ड 124 में उनकी मौजूदगी से परहेज़ किया गया—जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं।
BJP का लोगो भी प्रचार से ‘गायब’?
इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि BJP पार्टी का चुनाव चिह्न और लोगो बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री में खुले तौर पर इस्तेमाल करने से बचा जा रहा है, ताकि मुस्लिम मतदाता नाराज़ न हों।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संवेदनशील वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए उठाई गई सोची-समझी रणनीति हो सकता है, जबकि विपक्ष इसे दोहरी राजनीति करार दे रहा है।
रणनीति या मजबूरी?
स्थानीय मतदाताओं के बीच यह सवाल आम है कि
“जब उम्मीदवार BJP–शिवसेना (एकनाथ शिंदे) युति की हैं, तो पार्टी की पहचान को पीछे क्यों रखा जा रहा है?”
चुनावी प्रबंधन भले ही संतुलन साधने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन ऐसे फैसले ज़मीनी स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
आगे क्या?
मुस्लिम बहुल वार्ड 124 में अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि
- लो-प्रोफाइल प्रचार की यह रणनीति वोटों में बदलती है या नहीं,
- या फिर विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी लाभ उठाता है।
फिलहाल इतना तय है कि वार्ड 124 की लड़ाई अब सिर्फ उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि राजनीतिक पहचान, संदेश और रणनीति की भी परीक्षा बन चुकी है।
